Tuesday, 5 May 2009

सोते बेटे व पत्नी को चाकू से गोद खुदकुशी की कोशिश

नई दिल्ली, जागरण संवाददाता : कर्ज से परेशान एक अधेड़ ने मानवता और मानवीय रिश्ते की सभी सीमाएं लांघ दी। खस्ताहाल आर्थिक एक अधेड़ के लिए इतनी मुसीबत बन गई कि सुबह चार बजे उसने चाकू से अपने सोते हुए चार वर्षीय बेटे को मौत के घाट उतार दिया, इसके बाद उसने दूसरे बेटे और फिर पत्नी को चाकू से गोदा और अंत में खुद को चाकू से गोद कर खुदकुशी करने की कोशिश की। यह दिल दहलाने वाली घटना हुई है दक्षिणी दिल्ली स्थित बदरपुर के मोलड़बंद एक्सटेंशन में। घटना में सबसे छोटे बच्चे की मौत हो गई है, जबकि दंपति की हालत गंभीर है।
बदरपुर के मोलरबंद एक्सटेंशन में अनंत रावत पत्नी नंदनी (36) व दो बच्चे चेतन (4) और पवन (7) के साथ रहता है। सोमवार की सुबह करीब चार बजे उसने अपने चार वर्षीय बेटे चेतन को गले पर चाकू से वार किया। उसके बाद उसने बड़े बेटे पवन पर चाकू से वार किया। फिर पत्नी नंदनी को चाकू से गोदा और उसके बाद खुद को चाकू से गोद का जान देने की कोशिश की। खून से लथपथ होने के बावजूद किसी तरह पवन और नंदनी चिल्लाते हुए घर से बाहर की ओर भागे। बाद में आनंद को खुद को घायल करता हुआ बाहर की ओर भागा और सड़क किनारे गिर पड़ा। किसी तरह उसके बड़े बेटे ने पुलिस को सूचित किया। बाद में आसपास के पड़ोसी जमा हो गए। घटना में छोटा बेटा चेतन की मौके पर ही मौत हो गई, जबकि पुलिस ने अन्य तीनों को एम्स ट्रॉमा सेंटर में भर्ती कराया है। प्राथमिक उपचार के बाद बड़े बेटे पवन को अस्पताल से छुट्टी दे दी गई है, जबकि नंदनी और आनंद की हालत गंभीर है।
जानकारी के अनुसार, अनंत चार वर्षो से मोलड़बंद एक्सटेंशन में रहता है। उसकी मकान मालकिन राजमति ने बताया कि वह इलाके में ही करीब 15 सालों से रावत आयुर्वेदिक-सह-जनरल स्टोर चला रहा था। कई सालों से उसकी दुकान ठीक नहीं चल रही थी। ऐसे में कुछ महीनों से वह प्राईवेट नौकरी कर रहा था। पड़ोसियों के अनुसार उसकी यह नौकरी भी कुछ दिन पहले छूट गई। उस पर कर्ज था, माली हालत के कारण वह कर्ज नहीं चुका पा रहा था। कुछ दिन पहले कुछ महाजन उसकी दुकान से सामान उठाने की कोशिश भी की थी। पुलिस मामले की जांच कर रही है।
कल बाबा ने लगाया था चेतन को मरहम ..
नई दिल्ली, जासं : चेतन को रविवार को हल्की सी चोट लगने पर पापा ने उसे गोद में उठाकर मरहम लगाया था, लेकिन पता नहीं सुबह क्या हो गया पापा को कि उसके अपने जिगर के टुकड़ों को नींद से जगाकर अपने हाथों से काट डाला। कुछ ऐसे की दर्द भरे बातें कहीं सोमवार की सुबह की उस खूनी मंजर से बच कर निकले आनंद रावत के बडे़ बेटे पवन ने। इतना होने के बाद भी उसे अपने पापा पर विश्वास है कि फिर एक दिन उसके पापा उसे गोदी में उठाकर प्यार करेंगे। एक फिर ऐसी घटनाओं ने कई सवाल खड़े कर दिए हैं कि क्या आम आदमी के पास इतना भी दाल-चावल नहीं है कि वह अपने परिवार का भरण पोषण कर सकें? क्या लोकतंत्र के नायक आम लोग वाकई में नायक है या ये सब सिर्फ एक कहावत है।

1 comment:

Anonymous said...

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