जिन्दगी की दौड की आखिरी लाइन कौन जानता है जहां हर आखिरी लाइन के बाद एक और नई लाइन दिखती है
Tuesday, 10 March 2009
थैन्क गॉड, बिना जुगाड़ के दैनिक जागरण के डेस्क मिली नौकरी
थैन्क गॉड, बिना जुगाड़ के दैनिक जागरण के डेस्क नौकरी मिली, साल भर डेस्क पर काम चलता रहा, बहुत कुछ सिखा इस दौरान छोटी छोटी शब्दों में बड़ी गलतियां करता था, खैर अपने सहयोगियों और सीनियरों के डांट और प्यार से बहुत कुछ सिखा .. फिर ठीक ठाक चलने लगा
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